Kaagaz Ki Kashti
Jagjit Singh
ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी
मगर मुझको लौटादो बचपन का सावन
वह कागज़ की कश्ती, वह बारिश का पानी।।
मुहल्लेकी सबसे पुरानी निशानी
वह बुढिया जिसे बच्चे कहते थे नानी
वह नानीकी बातोंमें परियोंका डेरा
वह चेहरेकी झुरियोंमे सदियोंका फेरा
भुलाये नही, भूल सकता है कोई?
वह छोटीसी राते, वह लंबी कहानी
कभी रेत के उंचे टीलोंपे जाना
घरोंदे बनाना बनाकर मिटाना
वह मासूम चाहतकी तसबीर अपनी
वह ख्व़ाबोंकी दोनोंकी जागीर अपनी
ना दुनियाका ग़म था, ना रिश्तोंके बंधन
बडी खूबसूरत थी वह ज़िंदगानी